vivah mein phere

स्वयं देवताओं ने नारी को प्रथम स्थान दिया है I मातृकायें (नारी वर्ग) सदैव अग्रपूज्य (आगे) रहती है I प्रमुख देवताओं के नामों का जप करते समय भी आप यहीं पाएंगे जैसे राधे-कृष्ण, सीताराम, गिरजाशंकर आदि I जब देवता नारी को अग्रणी मानते है तो हमें भी मानना चाहिए I यही कारण है की विवाह में अग्नि का चक्कर लगते समय वधू आगे चलती है और वर पीछे चलता है I

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