भगवान् का चरणामृत पाप का तो नाश करता ही है उसके साथ शरीर के अंदर जो रोग-व्याधियां है उनका भी नाश करता है l रोगों के कीटाणुओं को मारने की अद्भुद क्षमता चरणामृत में होती है क्योंकि पचगव्य (दूध, दही, घी, जल, तुलसी पत्र) से बनाए गए चरणामृत में दही और तुलसी पत्र का विशेष महत्त्व है l तुलसी पत्र में रोग के कीटाणुओं को मारने की क्षमता भट अधिक होती है l दही में रोगाणुओं से लड़ने की अद्बुध क्षमता होती है जबकि दूध और घी शरीर को मजबूत एवं बलवान करता है और जल शरीर में जल की कमी को पूरी करता है l शक्कर मिले होने के कारण यह शरीर को तुरंत ऊर्जा (एनर्जी) प्रदान करता है l इस तरह वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी भगवान का चरणामृत अत्यंत लाभदायक है l स्मरण शक्ति, बुद्धि विकास आदि के लिए भी चरणामृत महौषधि है कारण कि चरणामृत को ताम्बे के पात्र में रखे जाने का विधान है जिससे उसमे ताम्बे की मात्रा भी सूक्ष्म रूप से मिल जाती है l आयुर्वेद के मतानुसार ताम्बे में अनेक रोगों की मारक क्षमता होती है l

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